बुधवार, 6 जनवरी 2021



भगत राम मंडोत्रा


 -1-

हे सरस्वती शारदा,  मिंजो  दे  वरदान।

मेरे दोहे पूर्ण कर,  हो  जिन्हां दा मान।।

-2-

दर्द  सब दे दूर करे, जगदी  जाए  जोत।

माँ  पुन बटे पाप कटे, मेरी मन्न मनोत।।

-3-

बैर  घटे  पियार  बधे,  देस  होय  खुशहाल।

होण पूरियां सब दियां,  सुखनां1 नोंयें साल।।

1.  मन्नतें

-4-

बेहद  सोहणा1 सुथरा,  येह्  हिमाचल  प्रदेश।

छैल1 पहाड़ बण2 नदियां,  गभरू3 नारां भेष4।।

1.  सुंदर  2.  बन  3.  युवा  4.  वेश

-5-

खूब हिमाचल सोहणा, सुथरा सबते1 खास।

इत्थी2  देवी  -  देवते,  भगता  करदे  वास।।

1.  सब से  2.  इधर


-6-

पैडी-पैडी1 खेत हन,  गोंह्दे-लोंह्दे2 धार3

लैंदे   हन   मोही मने,  पहाड़  दे  सिंगार।।

1.  सीढ़ी-सीढ़ी  2. चढ़ते-उतरते  3. पर्वत श्रृंखला

-7-

भांत - भांत  दी  बोलियां,  मिश्री मिट्ठे बोल।

आई करी हिमाचलें, कन्नां1 जो  बस खोल।।

1.  कान

-8-

छलियां  दी  रोटी  बणे,  सरुआं दा हो साग।

जेहड़ी1 बि जीभ चखदी,  गांदी तिसदे2 राग।।

1.  जो भी   2.  उसके

-9-

कुत्थी कुर्तियां1 - सुथणीं 2 ,  कुत्थी चोळे - ड़ोर।

भगत छैळ हिमाचल दी, शान लगे  किछ  होर।।

1.  कमीजें   2.  सलवारें

-10-

हर-इक चीज हिमाचलें,  मिलदी है भरपूर।

बस रोज़गार-रिज़क ही, घरां ते घणी1 दूर।।

1. बड़ी, बहुत


-11-

दूर  जाई   हिमाचली,  तोपदे1  रोज़गार।

आई इत्थु हन पळदे,  बाहर ते परिवार।।

1.  ढूंढते हैं

-12-

लगदे  पहाड़  सोहणे,  सब  दे  दिलां  करीब।

पर जितणे बि1 शहर बसे, हन सब बेतरतीब।।

1.  भी

-13-

मेलेयां च हन जुड़दे, मिलणियां कनें मेल।

आई नें दिक्ख भगता,  नोंयें-नौखे  खेल।।

-14-

छल्लियां1 दियां रोटियां,  घी  सरुआं2 दा साग।

तिस पर लगे सुआदली,  हरी मिरच दी लाग3।।

1.  मक्की  2. सरसों   3.  तीखापन

-15-

होंदा  बायीं1  तौंदिया2,  पाणी  ठंडा  ठार।

सियाळें निग्घी लगदी, छैळ गुनगुनी धार।।

1. बावड़ी में   2. गर्मियों में


-16-

भगता बड़े सुआदले, खो:रू1,रेह्डू2, छाह3

छेडे    देयी   हंडुयें,  मार   चटाके   खाह।।

1-2.  छाछ से बनने वाले व्यंजन  3. छाछ

-17-

नंगे पां पंदी1  बही2,  खांदे  धामा3  खाण।

पंडत पहनी धोतियाँ,  झट परींहदे4 जाण।।

1. लम्बी टाट(सफ्फ) 2.  बैठकर  3.  धाम में   4. परोसते

-18-

नित - नेम1 नें चल भगता,  बुढापा  करे  तंग।

दारूबाज नसेडियां, नि छड़दी जळी  खं:ग2।।

1.  नियमित दिनचर्या   2. खांसी

-19-

नशेड़ी  करी  नें  नशा,  सुकाई1 देण  प्राण।

खांदे जो न खाण मिले, मंजे जो नीं बाण।।

1.  सूखा देना

-20-

ये सोखा होय सिखणा, पर छड़णा दुश्वार।

नशे  ते बचणा भगता,  नशा करे बेकार।।


-21-

नाज़ुक जिस्म जो भगता,  नशे दा धूँ न देह1

डुब्बे  नशे ‘च  जेहड़े,  तौळी2  होई  खेह3।।

1.  दे, देना  2.  जल्दी  3.  राख़/धूल

-22-

नशा नीं  करना  भगता,  होए  कम्म खराब।

तू कुत्थु पींदा इस जो, तिज्जो1 पिये शराब।।

1.  तुझे

-23-

जिसजो बि ये खरी1 लगे,  उसजो करे खराब।

बची करी  रिहां  भगता, भली  नीं ये शराब।।

1.  अच्छी

-24-

सोबत  सब्र  शर्म गई ,  सुणोंह्दी तू-तड़ाक।

छो:रू1 डुब्बी  विच नशें, होए बड़े लड़ाक।।

1.  लड़के

-25-

नशा खाये माहणुआं, सिणक1 जिंहियां2 काठ।

छुटेया  कोई   विरला,  जिरड़ी3 इसदी  डाठ4।।

1.  दीमक  2.  जैसे  3.  मज़बूत  4.  दाढ़


-26-

नशे दे मुँहयें भगता,  लगणे  दी  है देर।

बड़ेयां-बड़ेयां1 करे,  पलें-छिनें ये ढेर।।

1.  बड़े-बड़ों को

-27-

भला  नीं  होंदा भगता, पीणा  मुफ्त  शराब।

जे लगी जाए लत तां, खाणा  फिरी खराब।।

-28-

सुबह-सबेर उठी करी, घुमणा-फिरना जाह।

नसकोडियां1 नें फिर लै, लम्मे-लम्मे साह।।

1.  नथुने

-29-

उसदी  कोई  रीस  नीं, जिसदा  बदन  निरोग।

अपणी हद च रही करी,  भोगां भगता भोग।।

-30-

पकुआण1  चिकणे - चुपड़े,  करदे तन  बरबाद।

रुक्खी-सुक्की खा: भगत, लैणा छड्ड सुआद।।

1.  पकवान


-31-

लगदे   खूब   सुआदले,   मैदा   चीनी  लूण।

भगत अति-खाण तन दे, तंतुआं जो धरूण1।।

1.  खींच कर बाहर निकालना

-32-

मजूर1 कनें किसान जो,  जिंहियां  मिल्ल-खेत।

मीर2 जिम च जाई करी,  बणान अपणी सेह्त।।

1.  मजदूर   2.  अमीर

-33-

नित रोज भ्यागा करना,  जितणा होए योग।

भगता फिरी मजे कनें, जीणे  दे  सुख भोग।।

-34-

सबेरें  जुआन   जबरे,   घुमणा  फिरना  जाण।

सजरी1 हवा साह2 लई, अपणी उमर  बधाण।।

1.  ताजा  2.  सांस

-35-

देर राती  दा  जगणा,  सुख - सेहत नीं  ठीक।

दिन चढ़ें सोणा भगता, घर-चैने जो लीह्क1।।

1. दाग


-36-

पोंदियें  पीडें   भगता,  लैणा  करी  इलाज।

बदपरेह्जी नीं करनी, कख्दां1 ते आ बाज़।।

1. आड़-जाड़ खाना

-37-

ओए सुआद जीण दा,  बधिया रखणा  खाण।

जिसते सबना सुख मिले,  मिट्ठा होय गलाण।।

-38-

हाजम  होंदा था कदी,  अड़ेयो आड़-जाड़1

सादा खाण करना लगा, बुढ़ापे ‘च  बगाड़।।

1. उल्टा-सीधा खाना

-39-

जिस्म तांईं माफिक नीं, कदी होय अति भोग।

जिन  दे काबू  जीभ  नीं,  पाळदे  मते1  रोग।।

1. बहुत

-40-

दुआंईं  कन्ने  करना,  पोंदा  भगत  भनेज1

नीं तां लम्मे टैम तिक,  पकड़ना पोय सेज।।

1.  परहेज


-41-

जितणा होय वशे1‘च  रख, ज़िब्हा शब्द-सुआद।

नीं  तां  ये   दिंदे  करी,  आण - बाण2  बरबाद।।

1. वश में  2.  आन-बान

-42-

होंदा सान1 नीं भगता, पचाणा आड़-जाड़2

इक  दिन  होई  रैंहदा,  सेहती  दा  कबाड़।।

1.  आसान  2.  उल्टा-सीधा खाना

-43-

हद  ते ज्यादा जेहड़े,  भगता  करदे  भोग।

जिस्म तिन्हां दे झटपट, जकड़ी लैंदे रोग।।

-44-

हरियाली है हर तरफ, रसे दी रेल - पेल।

रुत जुआन होई गई,  खेले नोखे1 खेल।।

1.  अनोखे

-45-

आई रुखां च रुत लई,  नोआं  हुण  पंगूर1

अंबियां जो दिख भगता, ओणा लग्गा बूर।।

1. अंकुर


-46-

हर  वरस  जांदे  बदळी,  नदियां  वगदे  बाह1

कुदरत दा पाया कुनी2, भगता अजतक थाह।।

1. बहाव  2. किसने

-47-

सैलियां1 कनकां क्न्नें, सरुआं2 प्यूळे3 फुल्ल।

बूटेयां    पंगूर4   है,  दिलें   मचांदा  हुल्ल5।।

1.  हरी  2.  सरसों  3.  पीले  4. अंकुर  5. हलचल

-48-

जीणे दा  होय  मकसद,  कुदरता  कनें  मेल।

तालमेल दे बिण भगत, बिगड़ी जाए खेल।।

-49-

नित  नोंयें    रूप  धरदी,  भगता  धौलाधार1

कुआरी2 कदी सुहागण, कदी वजोगण3 नार।।

1.  पर्वत श्रृंखला का नाम  2.  कुंवारी  3.  वियोगन

-50-

ये सोच पाळी1 चलियो, लगदा हुण सरकार।

मुकाई2  करी  बोलियां,  होंणी  हिंदी  पार।।

1.  पाल कर 2. खत्म कर के


-51-

अंग्रेजी   दे   सामणे,  हिंदी    खुद  कमजोर।

छिटपुट छोटी बोलियां, कुण करे तिन्ह गौर।।

-52-

रैह कलम रोज़ लिखदी, माँ-बोली गुणगान।

ज़िब्हां  जिसें  उपेडियां1, बोली सैह महान।।

1.  पहले-पहल जिससे बोलना शुरू किया

-53-

भुल्ले   सिखणा-बोलणा, पहाड़िया  दे  पूत।

भगता कुसी क्या करना, ओये1 ही गै ऊत2।।

1.  कुम्हार द्वारा आग में पकाने हेतु रखे मिट्टी के बर्तन  2. बरबाद

-54-

पहाड़ी  बछाणे1 पई,  घट जीणे  दे सार2

वक्खें3 बैठी झूरदा,  भगत बणी लाचार।।

1.  बिस्तर में  2.  आसार   3.  बगल में

-55-

तेरा   छैळ   पहाड़िये,   मुश्कल   बेड़ा   पार।

छड़णे असां बि नि अड़िये, हत्थां ते पतवार।।


-56-

होय    तेरा   पहाडिये,   किंहियां   कि   उध्दार।

वखरे होय धियां-पुतर, वख-वख करन बिचार।।

-57-

मां  बोलिया बोलण ते,  भगता मत  शर्माह1

तू अपणे-निपणे2 कनें, पहाड़िया च गलाह3।।

1.  शर्माओ  2.  अपने-पराये   3.  बात करो

-58-

ढंग खुशियां मनाण दे,  होए अजब जनाब।

लोक दिआळी पूजदे, हुण पी करी शराब।।

-59-

पाणियें  नें  दुध भगता, पतळा  होई  जाय।

छैळ रुआजां दे असां, असली रंग उड़ाय।।

-60-

जद सूरज राशि बदळे,  तद  होए  सगरांद।

जाए महीना पिछला, अगले दी हो आंद।।


-61-

मकर   सगरांदी   दा  दिन,  होंदा  सब  ते  खास।

शुभ कम्म लोक नुआड़ण1, खत्म होय खरमास।।

1.  शुरुआत करें

-62-

दो   दाणे   परसाद   दे,  होय  नि  कोई   रज्ज1

दुआ2 दियां दो टिप्पियां, कमाह्न कितणे चज्ज3।।

1. पेट भर खाना  2.  दवाई   3. चतुराई का काम

-63-

सगरांदी सैरी  दिया,  खेले  खित्तू - खोड़।

अम्मा सोहाळू 1 तळे, धियाणी घरें दौड़।।

1.  सुहाळू - तेल में तले भटूरू

-64-

पैसेयां   नें    बेचदे,   ये    बाबे   वरदान।

कपट-मुनियां ते भगता, रैहणा सावधान।।

-65-

कारीगर सब ते बड़ा,  भगता  है  भगुआन।

सूरतां घड़ी वखरियां,  बनाय सब इन्सान।।


-66-

काम क्रोध मोह लाळच, भगता माया जाळ।

जितणा  होय  दूर रही,  अप्पू  जो  संभाळ।।

-67-

शिवरात्रि ओंदी भगता, वरस1 च  बारह  मास।

फग्गण2 हनेर3 पक्ख4 दी, महाशिवरात्रि खास।।

1. वर्ष  2.  फागुन  3.  कृष्ण  4.  पक्ष

-68-

गीता पढ़ी  नें  मिलदा, भगत अणथाह ज्ञान।

दिख अजमाई रत्ति भर , होणी जिंद असान।।

-69-

उळझ-पुळझ दिंदे करी,  मामले धर्म-जात।

कुसियो तां वोट मिलदे, कोई खांदा मात।।

-70-

जात-धर्म   ते  है  बड़ा,  मितरो अपणा  देश।

इसदी इज्जत अणख1 जो, लगे न कोई ठेस।।

1.  स्वाभिमान


-71-

सैले1  प्यूळे2  केसरी,  रंग – बरंगे   रंग।

छोटे बड्डे खेलदे, होळियां  संग-संग।।

1.  हरे   2.  पीले

-72-

मेलेयां च थे करदे,  मिलणियां कनें मेल।

सान1 कित्ते मबाइलां2, सैह पराणे खेल।।

1. आसान  2. मोबाइल फोन

-73-

भांत-भांत रंग छळके,  हर तरफ बे-शुमार।

चोंह पासें चढ़ी गिया, होळियां दा खुमार।।

-74-

ये होळी  ओए लई1, जिंदगियां ‘च निखार।

खूब बरसाए खुशियां, होळियां दा त्युहार2।।

1.  ले आए  2. त्यौहार

-75-

रसयाळू1 बणाई करी, खुणदे2 थे इक तीण3

बोटी4 गैस चूल्हें हुण, रिन्हीं5 करी परीःण6।।

1. रसोई घर  2. खोदते  3. छोटी खाई (आग जलाने के लिए) 4. रसोइये  

5. पका कर 6. परोसना


-76-

जे  जींदे रखणे  भगत, अपणे  छैळ  त्युहार1

रैह् जोश खूब बणेह्या2, बदळे नीं ब्योहार3।।

1.  त्यौहार 2. बना हुआ  3. ब्यवहार

-77-

शहरां देयां  वासियां, लैणा  मुश्कल  साह।

पछतांण बस्सी शहरां, पई गिया गळफाह।।

-78-

शहरां दियां मुसीबतां, इक  ही  है  उपचार।

ग्रां1 कस्बे उप्पर उठण, कनें-कनें2 इकसार।।

1.  गांव   2.  साथ-साथ

-79-

घर दे उप्पर घर बणे,  पहाड़  बि  संग-संग।

दिक्खी करी नें शिमला, रही गिया मैं दंग।।

-80-

सुख - चैन  शान  सहुळतां, शहरां बधिया बास।

शहर भरोय तलमलियें1, लैणा मुश्कल सुआस।।

1.  कोर/कगार तक


-81-

ग्रां म्हारे1 हन सोहणे, बेशक होण गरीब।

शहर बड़े बुरे नीं पर,  बसयो  बेतरतीब।।

1.  हमारे

-82-

बणाई   लै   माहणुआं1,  पक्के   छैळ2  मकान।

चिड़ियां अपणे आहले3, किंहियां4 हुण बणान।।

1.  आदमियों ने  2. सुंदर  3.  घोंसले  4. कैसे

-83-

हुण ग्रां रैह नि ग्रांझड़ू,  बदळोइ  गिया  जीण।

बौड़ियां भरियां कचरें,  आरो1  पाणी  पीण।।

1. आर.ओ. (RO)

-84-

तरक्की दे फळ मिठड़े,  सुझण हुण सरेआम।

हर जगह लग्गे लगणा, सड़कां  लम्मे  जाम।।

-85-

होआ हर जगह झुलदी, इस च बसदे पराण।

गरां च मिले ये सुथरी,  शहरां  ज़हर समान।।


-86-

सिद्धे सोच-बचार हन,  सादे सबदे  जीण।

सब ते सोहणा भगता,  होए ग्रां दा जीण।।

-87-

झलदा1 नीं कोई कुसी, रिहा नीं रति थपाक2

भोळे - भाळे  ग्रांझड़ू3, बणी गै हुण चलाक।।

1.  झेलता  2.  मेल जोल  3. ग्रामीण

-88-

चेहरा  लाल लिसकदा1, लम्मे  काले  बाळ।

धर पग धरती गौरिये, है दिन चार बुआळ2।।

1.  चमकता  2.  उमस, तपस

-89-

चिट्टियां हन कलाइयां, लिसकदी लाल बंग।

चोंह  दिनां  दी चमक है, फिरी होय बदरंग।।

-90-

उज्जल1 बीणी2 गोरिए, लाल लिसकदी बंग।

चमकां-दमकां  चार  दिन,  जाणे  उतरी रंग।।

1.  सफेद, उजली, गौरी  2.  कलाई के लिए ‘डोगरी’ शब्द



-91-

औरत  दे  हक़ च  सब  ही,  बणदे पैरोकार1

भगता समझ ओंदा नीं, फिरी कुण गुनहगार।।

1.  पैरवी करने वाले

-92-

जुआनी इक फुल अड़िये, मुश्क नशा दो रोज।

चढ़ियो  नदी जे उतरी,  फिरी  लहरां न मौज।।

-93-

खेत-बाड़ी, पढ़ेंद-बां1,  कम्म नीं खास कार।

गरांझड़ु2 जणासां दियां, हालतां हुण सुधार।।

1. बावड़ी  2.  ग्रामीण

-94-

अड़ेयो तुसां  वाहजी1,  कौड़े  लगदे  साह।

किंहियां हुण मैं दसणा, कितणी मेरी चाह।।

1. बगैर

-95-

जो तेरी  दिल-जान ते,  खूब करे परुआह1

भगता होर तू उसते, रखे फिरी क्या चाह।।

1. परवाह


-96-

उस   घर   बसदे  देवते,  जित्थु1  बसदी  जणास2

मर्द खरे3 अपणी जगह, औरत बि नि घट4 खास।।

1. जहां  2. स्त्री  3. अच्छे  4. कम

-97-

घरे जो सुरगे1 बरगा2,  सजांदी  ये  जणास3

धरतिया4 रहणे लाइक, बणादी ये जणास।।

1.  स्वर्ग  2. की तरह  3. औरत  4.  धरती को

-98-

हक पाणे जो औरतां,  हंडी1  राह  ज़रूर।

अजहें मंज़िल लगदी,  अड़ेयो बड़ी  दूर।।

1.  तय की

-99-

धीयां दे   रखण  पहरे,  पुत्र  नज़र - अंदाज़।

छो:रू होण सज्जण तां, सुधरी जाय समाज।।

1.  बेटियां

-100-

बगीचेयां लगाण नीं,  फुल्लां दे शौकीन।

होण कंजकां पूजदे,  धीयां पर गमगीन।।



भगत राम मंडोत्रा



101-

कुसियो जकीन1 हो न हो, है होआं च शरूर।

भगता होई किछ न किछ2,  रैहणा है ज़रूर।।

1.  यक़ीन  2.  कुछ न कुछ

-102-

जणासां1 दे हक खातर, ब्यर्थ मचाणा शोर।

खुद खड़ोण पैर अपणे,  इस  पर होए गौर।।

1.  औरतों

-103-

कैंसरे  सांही1  भगता,  ये दाज़2 दा रुआज3

टब्बरां4 दी खुशियां पर, गिरदी इसदी गाज।।

1.  जैसे  2.  दहेज  3. रिबाज  4. परिवारों

-104-

मापेयां   दी    लाड़ली,   सौ:रेयां  घर  आय।

उस घरे विच पळी-बढ़ी, इस घरे1जो1बसाय।।

1.  घर को

-105-

चार  दिनां   दी   चानणी,  फिरी   हनेरी1  रात।

सामणे आह2 गौरिये, छड्ड3  ये छुप-छुपात4।।

1.  अंधेरी  2. आजा  3.  छोड़ दे  4.  लुका-छिपी


-106-

पढ़ी लिखी नें बेटियां, पैर अपणे खड़ोण।

व्याही1 नें माँ-बाप दे, फरज संपूर्ण होण।।

1.  विवाह किया

-107-

जित्थु घर-कित्ती1 बसदी, चौकस चतर जणास।

दुआरें  ओंद – जांद2 जो, बिन्ना3 पाणी आस।।

1. घर संवारने वाली  2. आते-जाते  3. बैठने हेतु बिछौना

-108-

अजकल दा ये मीडिया, करदा बड़े कमाल।

कराई फज़ूल बहसां, दबदा1 सही सुआल।।

1. दबाता

-109-

धोंदे हन साबण  बणी,  ये  जीणे  दे  मैल।

नुक्स निकाळण जेहड़े, करदे कम्मां छैल।।

-110-

सरहदां पर चत्तन1 हन,  खडे  गभरू  जुआन।

फा:ज़त2 असां दी  करदे,  लुटांदे जिंद जान।।

1. चौकन्ने  2. हिफाज़त


-111-

जुआनां दी शहादतां,  सारे  देशें  रोष।

सरकारा ते चांहदे, जवाब कोई ठोस।।

-112-

लोकां दिया हिफाजता, अपणी जान लुटाण।

सैहो  पत्थर  गाळियां,  अपणेयां  ते  खाण।।


-113-

कश्मीर राजनीतियें, तुआरी1 फौज़-पाण2

हत्थ बंदूकां भरियां,  लत्तां-मुक्के खाण।।

1.   उतारी  2.  आन, पैनापन

-114-

मसले दा टिकाऊ हल, होय नीं कदी जंग।

हारेयो  हन  मारदे,  वेल – सवेला1 डंग2।।

1.  देर-सबेर  2.  डंक

-115-

इस देशे च बुरी चली, भगता हुण ये रीत।

फौजां पर होणा लगी,  वोट दी राजनीत।।


-116-

बर्बादी  दा   सिलसिला,  होंदी  भगता  जंग।

लोक खुद तबाहियां दी, फिरी बि करदे मंग।।

-117-

घोर तबाही सिलसिला, होंदी भगता जंग।

पळदे - फळदे बागडू1,  झट होंदे बदरंग।।

1.  बाग़

-118-

देश  देयां  बहादुरां, जद्द1 करीड्डे2  दंद।

दुश्मन  पै  मुंहयें  बल, पैर पळेटी3 पंद4।।

1. जब  2.  कटकटाये  3.  लपेट कर  4.  टाट

-119-

असां  देयां   बहादरां,  देही1  मारी  चंड2

बैरियां दी बची-खुची, भन्नी दित्ती कंड3।।

1. ऐसी  2. थप्पड़  3.  आन

-120-

खिंज्जी दित्ती फौजियां,  डोरा1 दी इक तंद2

दुश्मणा दे गै निकळी, भगता  दिक्खा  दंद।।

1. डोर-रस्सी 2. धागा  


-121-

शहीद होण जुआन ही, जाहलू  होय  जंग।

दो दिनां दी हमदरदी, फिर  नीं  कोई  संग।।

-122-

देश दे अंदर दुश्मण,   लोको  मजे  उडाण।

बेला-कुबेला दिक्खा, दुश्मण दे गुण गाण।।

-123-

खांदे जिसा बि थाळिया, उसा च  छींडा1  पाण।

जनहित दे हर कम्म विच,  कढ़दे फिरदे काण2।।

1.  छेद  2.  नुक्स, कमी

-124-

इत्थी1  खांदे  -  रैंहदे,   गांदे   उन   दे   गाण।

जयचन्द अज दे भगता, देश दी पत2 लुटाण।।

1.  इधर  2. इज्जत

-125-

सिद्धी1 गल्ल जो पुट्ठा2, करदे हन ये पेश।

देणा टी वी चैनलां,  भगत बगाड़ी3 देश।।

1.  सीधी  2. उल्टा  3. बिगाड़ना


-126-

दुध  दिंदियां  दी  करदे,  थोड़ी-बोह्ती1 पाळ।

गांयीं2 सुक्कियां3 भगता,  होई जाण नभाळ4।।

1.  थोड़ी-बहुत  2. गांयें 3. सूखी(दूध देने से बंद) 4. गुमशुदा  

-127-

गा1 बचारी बेबस हुण,  फसी गयी मझधार।

लई2 तरांदी3 थी कदी, लोकां भुजला4 पार।।

1.  गाय  2.  लेकर  3.  तैराती  4. पौराणिक नदी

-128-

दरोहियां  दी  अजकलें, देस च नीं है घाट।

गुण दुसमणा दे भगता, गायी  करदे  काट।।

-129-

मज़ाक  मुद्दा  गै  बणी, गांयीं कनें गरीब।

भाग सबना दे चमके, इन दे फुटे नसीब।।

-130-

भेतां1   देई2    विभीषण,  लग्गे   लंका   ढाण।

खूब होंसले फौज दे, तिल-तिल करी डिगाण।।

1.  भेद  2. दे कर


-131-

जंग च नीं है लाजिमी, जित्त होय हर बार।

पाणे  तांईं1  ताकतां,  होंदा  रैह  बचार2।।

1.  के लिए  2.  बिचार

-132-

अज़ादी  दी लडाइया,  जो थे  होय शहीद।

होइयो पूरी कितणी,  अज तिन्हां दी मीद1।।

1.  उम्मीद

-133-

मुल्क पर जान देण दा, कुत्थी नीं कानून।

ये होंय इक सैनिक दा, देश तांईं  जनून।।

-134-

बड़ी बेबस बणी गई, भगता अजकल गाय।

दुध दिंदी बन्ही1 लई, सुकी2 तां बाय-बाय।।

1.  बांध ली  2. सूख गई/दूध देना बंद कर दिया

-135-

माउ1 बरोबर कांहदी2, भगत बचारी3 गाय।

बुढे – बारेयां4  रुलदी5,  पुत्रां  जो  रंभाय।।

1. माँ  2. कहलाती  3. बेचारी  4.  बुढ़ापे में  5. भटकती


-136-

हालत  मेरे  देश  दी, भगता गऊ समान।

दरोही1 दुध लई करी, लैणा लग्गे जान।।

1.  द्रोही 

-137-

मीडिया ‘च  महिमा लिखी, सरबण पुत्र कहाण।

दिखणा-पढ़ना ओय  नीं, अम्मा तां अणजाण।।

-138-

लोक घट ही हन पढदे, मुफ्त मिलियो किताब।

ख़र्चेया    पैसा   भगत,   मंगदा   रैह्  हिसाब।।

-139-

लिखारी बणी गै मते,  पढ़ाकुआं  दी  घाट।
बंद कताबां रोंदियां, भाळण1  बेबस  बाट।।

1.  देखतीं

-140-

वक़्त  बिताणे  जो  करे,  कलमा  नें  तकरार।
न तां तू कवि ही 'भगता', न ही साहित्यकार।।



-141-

लिखणे  वाळे   बोहते,   पढ़ाकुआं   दी   घाट।

कताबां दी लमारियां1, चुप सिणक2 गयी चाट।।

1.  अलमारियां  2.  दीमक

-142-

जोड़ी   कित्ती1  दो  हरफ2,  जुमले  दी  तामीर।

अक्खर2 बणाए कवियां, फिरी अपणी जगीर।।

1.  कर दी  2. अक्षर

-143-

लस्ट-पस्ट1 लिक्खी घडण, पुट्ठे-सिध्धे बिंब।

फणसोई2  कनें  फुलदे, जिंहियां होय ढिंब3।।

1. उलूल-जुलूल  2. आत्मप्रशंसित 3. पेट फूलना

-144-

जेहड़े ग्लोई चुकियां,  गल्लां मुड़ी गलाण।

खूब फणसोई फुलदे,  रचनाकार कहाण।।

-145-

भगत कविये दी मितरो, नोखी रही पछाण।

सहत्तरां जो ढुकेह्या, लोक नोंआं  गळाण।।


-146-

जियादा  कोई  जितणा, अपणा करे प्रचार।

सैह उतणा  ही बड्डा, गुणी साहित्यकार।।

-147-

है कुण अपणे-आप जो, समझदा इत्थु घट्ट ।

तू बि दौड़ी चल भगता,  मुट्ठी अपणी बट्ट ।।

-148-

सब ते छैळ1 लिखणे दा,  वहम कदी2 मत पाळ।

होरना3 दा  पढ़ी  करी,  अपणी  कर  पड़ताळ।।

1.  सुंदर  2. कभी  3.  औरों का

-149-

बन्द  कमरेयां  कविये,  करदे कवता1 गान।

इक-दूजे जो सुणाई, बधाण2 भाखा3 मान।।

1.  कविता  2.  बढायें  3. भाषा

-150-

धियां जो सब  सरांहदे,  नुहां  जो  कोय  कोय।
इक्को जान खरी बुरी,   किहियां 'भगता' होय।।


-151-

पिओये न जल खोदळा1, पर अग्ग तां बुझाय।
चाहे  रिस्ता  हो   बुरा,   ज़रूर  कम्में  आय।।
1.  मटमैला

-152-

दाळी जो तड़का लगे,  होए खूब सुआद।

रिस्ते कनें रुक्ख1 जो, मिलदी  रैहे खाद।।

1. पेड़

-153-

किहलेयां1 क्या हंडणा2,  चलदे  दोयो  संग।

हो जाय सफाई-सुलह,  या छिड़े फिरी जंग।।

1. अकेले  2. चलना

-154-

हंसी-मज़ाकें  भलिये,   दिले  कनें  मत  छेड़।

नाज़ुक चीजां च अड़िए,  तौळी1 पोय तरेड़2।।

1.  जल्दी ही   2.  दरार

-155-

आ पल भर  बैह1 भलिये2 ,  करी  लैंदे  हिसाब।

कितणी कि भली गुज़ारी, कितणी कटी खराब।।

1.  बैठ  2.  सजनी


-156-

इस किस्मता दे भगता, बड़े नराले1 खेल।

बिछोडे रैहे कुतकी2, मिल्ले ही नीं मेल।।

1. निराले  2.  कहीं

-157-

कोई   सोगी1 नि  मरदा, सारे लोक गलाण2

प्रेमी होआ च उड़दे, झुठियाँ कसमां खाण।।

1. संग, साथ  2. बोलें 

-158-

बेटियां होण गुडरियां1, माँ-बब्बां2 दी जान।

इन्हां ते होय भगता,   दो कुलां दी पछाण।।

1.  तितलियां  2.  माँ-बाप

-159-

कुसदा फ़र्ज़ क्या भगता,  सुप्प1 लई  नें  छंड़2

टब्बरे ‘च3 अपणे फिरी, जथाजोग4 कर बंड़5।।

1. सूप  2.  छांट  3. परिवार में  4. यथायोग्य  5. बांट

-160-

पियार, विसुआस1, इज्जत; रिस्तेयां दी  खंड2

सिणक3 बणी चट्ट करदा,  भगत इन्हां4 घमंड।।

1. विश्वास  2. खांड, मिठास  3.  दीमक  4.  इनको


-161-

अपणेयां च बुरा भगत, बोल बहस तकरार।

टब्बरे विच इक जितदा, बाकी जांदे  हार।।

-162-

कंधां1 चिणी2 नें बणदा, भगत बस इक मकान।

घर  तां   बणादे  उसजो,  रही3  करी  इन्सान।।

1.  दीवारें  2.  बना कर  3.  बसा कर

-163-

रिस्तेयां दी है बड़ी,  नाजक1 भगता  ड़ोर।

खिंजदेयां2 जाय टुटी,  जे जाय पई3 जोर।।

1.  नाज़ुक  2. खींचते ही  3.  पड़

-164-

रिस्तेयां ‘च  नीं भगता, रसदा कदी गरूर।

सगेयां बि जांदा लई, बिछोड़ी घणी दूर।।

-165-

माउ - धियाडें1  गाइते,  मीडिया ‘च  गुणगान।

इतणे च मन्न अमडिये2,  तु जायां3 दे सहान4।।

1. मातृ दिवस  2. अम्मा  3. सन्तानों  4. अहसान


-166-

मरणे परंत बि  मनुखां, नां1 रहणे दी चाह।

करदे कम्म खरे-बुरे, अमर होण दा लाह।।

1.  नाम

-167-

धन पाप  लुकाई  करी,  करदे  घोळ - मचोल।

सैह दिन औणा भगता, खुलणी सब दी पोल।।

-168-

रेहड़ी पर गरीब  दी,  बहसी  करदे  भाव।
सैयो1 चुकांदे दुगणा, जाई मॉलां2 सा:व।।
1.  वही  2. मॉल में

-169-

चुक्की1 घुम्मे उमर भर,  वहमां दी इक पंड2

भेत3 खुल्ला अंत समें, सैह4 था सब पखंड।।

1.  उठा कर  2. बोझ  3.  भेद  4.  वो, वह

-170-

दूजे  दे   दुख   दरद   दी,  कोई  नीं   लै  थाह।

शांत दिक्खी  नें दुखिये, लोक बोलदे ‘वाह’।।



-171-

माहणुयें दे कर्म फळ,  हंडदे  संग-संग।

सबना दा होंदा असर, देरें कदी तुरंत।।

-172-

जागण  बेला  जेहड़े, चादर ओढ़ी सौण।

बीते  वक़्ते  जो भगत, ढां पाई  नें रौण।।

-173-

बिण बुलाय मत जा‌: कदी, बगैर जाण पछाण।

पुच्छ कोई न होय तां,  मुसकल मुंह  छुपाण।।

-174-

भलेयां  वक़्तां  भगता, मित्तर  मते खड़ोण।

ओय मुसीबत जाहलू, भले-बुरे पणछोण1।।

1. पहचाने जायें

-175-

बिट्टियां   वाळे   पहलें,  मंगदे   थे   दहेज।

लड़के वाळे चाकरी, बजांदे बिण भनेज1।।

1. परहेज


-176-

कामयाब  लोक  करदे, नीं  नित नोंयें कम्म।

सैह जेहड़ा बि करदे, तिस विच होंदा दम्म।।

-177-

सच  तां  सच ही रैंहदा, जितणी बि करा जांच।

दबोह्या1 ओय साह्मणे, सच जो होय न आंच।।

1. दबा हुआ

-178-

जिंदगी है इक दरिया, डुग्घे चौड़े बाह1

सैही पारें  लंघया,  जिन्नी पाया थाह2।।

1. बहाव का मार्ग  2. अनुमान

-179-

जितणा बि जिसजो मिलदा, सैह मंगदा होर1

भगत  अणमुक  ज़रूरतां, है  नीं  कोई ठोर2।।

1. और  2. संतोष

-180-

जिंदगिया  दिया  सडका,  करड़े1 भगता मोड़।

हिम्मत मिहनत2 होंसला, हन तिन्हां दे तोड़3।।

1. कठिन  2. मेहनत  3. हल


-181-

जितणा  कि  होंदा  करड़ा1,  इक कम्म दा कमाण।

उतणा ही सान2 भगता,  कढ़णा3 उस विच काण4।।

1.  कठिन   2.  आसान  3.   निकालना  4.  दोष

-182-

जित्थु1 करने जो  भगता,  है  नीं  कोई  कम्म।

तित्थु2 माहणु हन करदे, फिरी कोई धड़म्म3।।

1.  जहां  2.  वहां  3. उल्टा काम

-183-

बड़ी बुरी होय भगता,  दुक्खी दिल दी आह।

जिस पर ये जाए पई1,  करी दिंदी2 सुआह3।।

1.  पड़  2.  देती  3.  स्वाहा

-184-

मारा ते मचूच1 बुरी,  बुज़ुर्गां दा गळाण।

असरदार  बंदूक ते, हाखीं तीर कमाण।।

1. चेहरे के हाव-भाव से डराना

-185-

फळ तोड़दयां कुण करे,  डाळुयां  दि  परुआह1

मतलव कड्ढी2 बोलदे2,  जित्थी4 जाणा जाह।।

1.  परवाह  2. निकाल कर  3. कहते हैं  4. जहां


-186-

लोक होए सुआरथी,  करण देश बदनाम।

बिकणे जो बैठे भगत, औणे-पौणे1 दाम।।

1.  कम से कम कीमत पर

-187-

जिन्हां   दे   खूनें   घुळे,  गाढे   नफरत   रंग।

भगता किंहियां बणनी, बणोत1 तिन्हां संग।।

1.  मेलजोल, दोस्ती

-188-

बड्डा  कौ1 जा  बैठदा,  भगत  बड्डे  करंग2

ओपरे3 ताम - झाम  दे,  खुलदे4  असली रंग।।

1.  कौआ 2. मरे हुए जानवर का अस्थिपंजर  3. बनाबटी  4.  खुल जाते

-189-

कम्म  करने  ते  पहलें, पलकांह्दे1  हन लोग।

करना लग्गा तां फिरी,  नि निभांदे हन सोग2।।

1.  उकसाते  2. साथ

-190-

भुलक्कड़ दुनिया भगता, तौळी1 भुल्ली जाय।

चेता2 रैहे इस लई, वख-वख3 दिवस बणाय।।

1. जल्दी  2. याद  3. अलग-अलग


-191-

गरीबां दे मित्तर नीं, मीरां1 जो नीं  घाट।

मतलव तांईं झाकदे, इक-दूजे दी बाट।।

1.  अमीरों

-192-

जितणा भला बणी लिया, नुक्स निकाळण लोक।

सिद्धें1   रस्तें   हंड़2   तू ,   पैरां   जो   मत   रोक।।

1.  सीधे  2.  चल

-193-

चोरां जो नीं जंदरे1, जुआडुआं2  नीं  बाड़।

संभळी नें रैह् भगता, रख  इन्हां  दी ताड़।।

1.  ताले  2. उजाड़ने वालों को

-194-

जिंद झमेला नीं भगत,  है  बांका1 इक गीत।

सुर लगे बिणा हार है, लगी जाय तां जीत।।

1.  खूबसूरत

-195-

बड्डे   रुखां  दी   भगता,  डुग्घी1  लोह्ये2  पौह्ढ3

थल्लें4 किछ सरहोय5 नीं, घणा की होय औह्ढ6।।

1. गहरी  2. उतरे  3. जड़  4.  नीचे   5. पनपे  6. छाया/ढक लेना


-196-

मिले जे नीं मकसद तां, मत  कर  भगता कोप।

इक  रोज़  ज़रूर मिलणा,  पाई  छड़ तू तोप1।।

1.  तलाश

-197-

कदी   हत्थां  थे  भगता,  पैने  तीर - कमाण।

सैह् ड़रदे  कबूतर  हुण, चुंज1 चुभांदे जाण।।

1. चोंच

-198-

लाळचियां दी भुक्ख1 दा, होय नि कोई ठोर2

जितणा  मिल्ले  नि रजदे3, भगत मंगदे होर4।।

1.  भूख  2.  सीमा  3. संतुष्ट  4. और

-199-

जिन्ह दे नां1 खूब बड़े, पर सोच होण तंग।

अंदर  बाहर तिन्ह  दे,  वखरे-वखरे  रंग।।

1.  नाम

-200-

अच्छाई  बुराई   दी,  जाहलू   होय  छिंज1

लोक बुरे ते जरकदे2, भले जो पांण खिंज3।।

1.  कुश्ती, दंगल  2.  ड़रते  3.  दबाव







भगत राम मंडोत्रा

-201-

देवते    मनांदा    रिहा,    चढांदा   गिया   रोट।
मनें थलोह्पी1 दिक्खया, करनी  दा  था खोट।।
1. ढूंढ कर

-202-

जी भरी करी जी: भगत, जद तक चलदा साह।

ओणा  मौता  अप्पु  ही,  मत कर तू  परवाह।।

-203-

भगता  सफर  ते  पहलें,  खुद  इक  बत्त1 बणाह।

फिरी उस पर चलणे दी, बधिया2 जुगत3 लगाह।।

1.  रास्ता  2.  बढ़िया  3.  युक्ति

-204-

मैं था सोचदा जबरा1 , होंगा कोई होर2

आइ  बुढापा बैठया,  मेरें ही सिर चोर।।

1.  बूढ़ा  2.  और

-205-

बदळी करी  नें  खुद  जो,  ओंदा  है  बदळाव।

होरसी1 बदळणा गिया2 , होया3 भगत खराब।।

1.  और को  2.  गया  3. हुआ


-206-

जे  तू  जीणा   है  भगत,  तां   जी   ऐसा  जीण।

इक करे अगर नाळसी1 , होर न करण जकीन2।।

1. निंदा  2.  यकीन

-207-

जिन्हां दी करदा रिहा,  तू जी भर परुआह1

तिन्हां जो नि ओ भगता,  तेरी कोई फाह2।।

1. परवाह    2.  चिंता

-208-

बणादा रैह चुप करी, अपणी भगत  पछाण।

होआं बि गाणे इक दिन, तेरे ही गुण गाण।।

-209-

खं:ग करदा जां मितरो,  खूब करां मैं खांस।

जत्तन तां खूब कित्ते, पर निकळी नीं सांस।।

-210-

गुज़ारी  दित्ती  जितणी,  भगता उसते सिक्ख।

फिरी तू सोची समझी, अग्गे बक्खी1 दिक्ख।।

1. की तरफ


-211- 

कुसी बि माहणु-वस्त1 दा, बणना खरा नि दास।

बिछडदी  बेला  भगता, दिलडू 2 होय  उदास।।

1.  वस्तु  2.  दिल

-212-

पीढियां दा नीं भगता, मुसकल होये जीण।

असां सांभी नें रखणे, होआ पाणि जमीन।।

-213-

सुआद है घड़ी भर दा,  ज़ळव1 होय अणथोह।

मिठ्ठी चीज़ छळ भगता,  मत  करदा  तू  मोह।। 

1.  परेशानी  

-214-

मोह माया ते बचणा,  मती मत रखा आस।

पढांदे  बाबे नकली,  खुद  माया  दे  दास।।

-215-

पैरां  मत  पांदा  कदी,  नदिया  जदी  उफाण।

पल भर रुकी जा भगता, होणा तुरत लुहाण।।

-216-

सब  दी अपणी आबरू, अपणी-अपणी  आन।

घट्ट  कोई  नीं अजकल, सब ही हन बिदुआन।।   

-217-                                            

पछाण1 हद्दां2 अपणियां, अपणे आपें रैह।

बाहर  होया  तां  फिरी, पौणी3 है पलैह4।।
1.  पहचान  2.  हदें  3.  पड़ेगी  4.  मार

-218-

तकदीर  भरोसें  बही1,  माहणु वक़्त गुआय।

सब हल होई जाय जे,  अपणे हत्थ चलाय।।

1.  बैठ कर

-219-

भुल्लां कदी1 मत  भुलदा,  लैंदा रेह्यां सिक्ख2

ये हन भाग बणादियां, मिटे  कदी नीं लिक्ख।।

1.  कभी  2.  सीख

-220-

लम्माई1  नीं  जीण  दी,  तू  घह्राई2  नाप।

छोटी चाहे जिंद हो, पर छड्डे इक छाप।।

1.   लम्बाई   2.  गहराई


-221-

जीणे जोगी1 जिंदगी,  मित्रा कर विसुआस।

इस जकीनें2 ही बणना,  तेरा जीणा खास।।

1.  योग्य   2.  यकीन में

-222-

अपणे  किस्ती-चप्पुआं,  अप्पू  ही  संभाळ।

फेरां च फसी जिंदगी, अपणे आप निकाळ।।

-223-

काबू  करी  नें  गुस्सा,  करदा चल तू काज।

तौळा1 नि जवाब देणा, इसदा ये ही लाज2।।

1.  जल्दी, शीघ्र   2.  इलाज

-224-

दुये1  दे गुस्से दी अग2 , मत मितरा अपणाह3

थोड़ी देही सबर4 कर, फिरी तू कम5 कमाह6।।

1.  दूसरे  2. आग 3. अपनाओ  4. सब्र 5. काम 6. कमाओ

-225-

कमाणा  सोची  समझी,  झट देणी नीं छाळ1

नज़र रैह अग्गे2 वखी2 , पिच्छें रखणी भाळ।।

1.  छलांग   2.  आगे की तरफ


-226-

दिक्ख-सुण  करी  दौड़नी, जिंदगिया  दी  दौड़।

स्हेडया1 सांभी2 रखणा, पच्छां3 नि होय चौड़।।

1.  अर्जित किया हुआ, कमाया हुआ। 2.  संभाल कर  3. पीछे से

-227-

हारां ते  हारी  करी,  मनदा  मत  तू  हार।

हारां ही हन खोळणे, जित्तणे जो दुआर।।

-228-

मुसकाणे दी बजह बण, दिल कुसी दा न रोय।

भला चाहे मत करदा,  बुरा  कुत्थी  न  होय।।

-229-

जिंदगी इक सफर भगत, करड़े1 नाळ-कुआळ2

पैरां   पड़ाई3  चलयां,   दिंदा   मत  तू  छाळ4।।

1.  कठिन 2. नाले और चढ़ाई के रास्ते  3. जमा कर  4. छलांग

-230-

नाकामयाबियां जदी1 , भगता होश उड़ाय।

मीदां2 आई ताहलू 3 , बुझदे दीप जलाय।।

1.  जब  2.  उम्मीदें   3.  तब


-231-

पहलें  मने  ते  अपणे, निकाळ सारे  खोट।

पाणा निकळेयां फिरी, भाऊ अपणा वोट।।

-232-

अपणे  घरे  दा कचरा, होरती1  मत  खिलार2

ये धरत3 घर है सब दा,  भगता इसा सुआर4।।

1.  और जगह 2. फैला 3. धरती 4. सँवार

-233-

बदन-वजन हो या फिरी, रिस्तेयां च तरेड़1

काबू   करने   तंइयें2 ,  करना  पोय3  परेड़।।

1.  दरार  2.  हेतु  3. पड़े

-234-

जिन्हां  खाणी  सैह  हुण, खांदे रैहण खार।

सिद्धे रस्तें चल भगत, मौज मजे  नें  मार।।

-235-

रंग फिक्के जाण पई1 , रंगां पर मत डोल।

निश्चे2 नें बैठी  करी, भगत गुणां तू तोल।।

1. हो (जाना), पड़ (जाना) 2.  तसल्ली से


-236-

नोंआं नज़ारा  दसदा¹, सड़का  दा  हर मोड़।

रैह् बदळोंदी जिंदगी, भगता आस न छोड़।।

1.  दिखाता है

-237-

चुप-चपीते नीं चलणा, गप्प-गडोंजा मार।

सोगी-सोगी1 चलदयां, होणे  पत्तण पार।।

1.  साथ-साथ

-238-

जितणी  बि  भलाई करा, खुश नीं होंदे लोक।

चुप-चाप करदा चल तू,  पैरां जो मत  रोक।।

-239-

गल्ल गलाणा लाज़मी, गल्ल मुश्किल दा हल।

अपणी गल्ल गला: कनें,  दुये दी  सुणदा चल।।

-240-

कुसी ते किच्छ पाण दी,  मत करदा तू चाह।

जितणा बंडोंदा  भगत, अप्पु  बंडदा  जाह।।


-241-

हिरखियां1 दे हन भगता, तिज्जो उपर सहान2

जेहड़े   तिज्जो  मनदे,  खुद  ते  बड़ा  महान।।

1.  ईर्षालुओं  2. अहसान

-242-

तू दिखदा न तां बिक़दा, तिज्जो क़ज़ो मलाल।

जो दिखदे पर नि बिकदे,  पुछ तिन्हां  दे हाल।।

-243-

देणा पोय कर्ज़ लिया:,  नीं  तां  होंदा  कोप1

पैरां पर खड़ोह्2 भगता, मत मदतां3 तू तोप4।।

1.  कष्ट  2. खड़ा हो  3. मदद  4. ढूंढ

-244-

बैर -  बरोध   बधाण   दे,  करदे   कई   उपाय।

धर्म-अन्नेहां1 कुण हुण, किंहियां कि समझाय।।

1.  अंधों

-245-

पाणा इज्जत मान तां, बाह्धू 1 नीं तू बोल।

पियारे  तांईं  भगता,  मुंह्यें  मिसरी  घोल।।

1. फालतू


-246-

कर  लै  जेहड़ा  करना,  करदा कज्जो  देर।

घडिया भर जो खुंहजे1 , हंडे2 लम्मा3 फेर।।

1. चूके  2.  चले   3.  लम्बा

-247-

घडियें – मुड़ियें1 सामणे, ठीक नीं रैह ओंण।

जेहडे  सलाम करदे,  हन लगदे पखलोण2।।

1. बार-बार  2. अजनवी बनना

-248-

भले ही छैल जीण दी,  होय  न  पूरी  चाह।

अपणा ईमान भगता, मत तू कदी गुआह1।।

1. खोना

-249-

जित्थू 1 जवाब   देण जो, सही  नीं  होण  बोल।

ओत्थू 2 भगत तू अपणा, मुंह कदी3 मत खोल।।

1.  जहां  2.  वहां  3.  कभी

-250-

जितणी  की  है जिंदगी, हस्स-खेली गुज़ार।

काह्लू पता नि जाण जो, होणा पोय तियार।।


-251-

जे  जिंदगिया च  करना, तुसां खरा1 बदलाब।

तां दूजे दी बि सुणना, सिक्खी लिया जनाब।।

1. बढ़िया

-252-

चुप रैहणा इक तप है,  होय नि इतणा सान2

वक़्ते पर  बोले सही,  सैह  बड़ा  विदुआन।।

1. आसान

-253-

जाणा कदी-कदाय1 दा, खरी2 हो पुछ-पछाण।

रोज़ परोहणचारियां3 ,  बिन्ना4 न ही वछाण5।।

1. कभी-कभी 2. अच्छी 3. मेहमान गिरी 4. बैठने का बिछौना 5. बिस्तर

-254-

मन  पंखेरू काहळा1 ,  उँच्ची भरे  डुआर2

जिन्नी3 हुडेया4 इसजो,  सैह ही समझकार।।

1. बेताब  2. उड़ारी 3. जिसने 4. बन्द करके काबू किया

-255-

जीणे दा मकसद महज,  पाणा  नीं  है मान।

जितणा की होए मनुख, कठेरी1 चले ज्ञान।।

1. एकत्रित करना (कठेरना)


-256-

जेहड़ा कम्म करन दा, ओय  ही नीं सुआद।

भगता करी नें उस जो, वक़्त होय बरबाद।।

-257-

होय जिंदगी जीण दा, अपना ही इक ढंग।

दुनिया जो तू जाण दे, घड़ी च बदळे रंग।।

-258-

सोच ही कुसी कम्म जो,  छोटा  बड़ा  बणाय।

बड्डे  कम्म  तलाशदा, माहणु वक़्त गुआय।।

-259-

बोलणे ते तू पहलें,  सुणना  भगता सिक्ख।

बदळी जाणी जिंदगी, अजमाई नें दिक्ख।।

-260-

जेहड़े  बि  हिरखें1 जळे, हार मन्न  गै जाण।

सैह तां तिज्जो भगता,  खुद ते अग्गें पाण।।

1. ईर्ष्या


-261-

रस्ते बदळ मंजिल नीं,  जे जाणा उस पार।

कामयाबियां दा भगत, ये ही है इक सार।।

-262-

सुथरी  सोच  रख  भगता,  फिकर  न कोई फाह1

कुदरत दिया कचहरिया, वकील जज न गुआह2।।

1. चिंता  2. गवाह

-263-

ज़हरे दी तां ज़हर ही, करदा भगता काट।

चेडां  तू नफ़रत दियां, पियारे कनें पाट।।

-264-

पैर अपणी चादर ते,  मत  भगता  लमकाह1

छड्ड पराई  चोपड़ी,  रुक्खी  सुक्की खाह।।

1. बाहर निकालना

-265-

वचपण  कनें  जुआनियें,  कित्ते  कई  ढभंझ1

हुण राम नाम जप भगत,  ढळणा लग्गी संझ।।

1. पाखंड


-266-

बिण सोचेयां जेहड़े, अग्गें  लगाण  दौड़।

तिन्ह दे पिच्छें भगता, होंदी जांदी चौड़।।

-267-

हुण नेहरी रात  सही,  भयाग नीं  है  दूर।

हर चीज रैह नीं सदा, कुदरत दा दस्तूर।।

-268-

बेहलपणे1 दी सिणकां2 , तन-मगज़³ करण चट्ट।

जींदे  रैहणा  है  तां,  रोज  भगत  किछ  खट्ट4।।

1. बेकारी  2.  दीमक  3.  दिमाग  4.  कमाओ

-269-

मरने दिया निहाळपा1 ,  जंग्घां2 न तू पहार3

होय तिज्जो ते जितणा,  करदा रैह वपार4।।

1. इंतज़ार  2.  टांगें  3. पसार 4. लेन-देन

-270-

दंद, बब्ब1 , नांयें कनें,  भगता मत तू छेड़।

लै  थे  पंगे  जिन्ह  नें, लग्गे  लम्मे  गेड़2।।

1. बाप  2.  चक्कर


-271-

हार1 हंडीते2 पधरे3 ,  गाहे4 नाळ - कुआळ।

हुण घर खड़ोती गड्डी, तुरत5 गेयरें डाळ।। 

1.  लंबी-चौड़ी भूमि 2. पैदल चले 3. सपाट 4. पार किए 5. तुरंत 

-272-

करनियां पर कदी-कदी,  करदे  रैह्णा  गौर।

भगता  इत्थु1 ही मिलदे, भले-बुरे दे छोर।।

1.  यहां

-273-

जियादा  होये  जितणी,  जिसदे  अंदर  पोल।

अवाज1 उतणे ज़ोर दी, भगता कडधा2 ढोल।।

1. आवाज  2. बाहर निकालता

-274-

धरती कनें दमाक1 जो, भगता खूब खरोल2

उतणी ही  ज्यादा फिरी, पैदावार  तू  तोल।।

1. दिमाग  2. कुरेद  

-275-

जिन लोह्यां जो चढ़ गयी, जियादा भगत पाण1

मार  सैह   खूब   करदे,  पर  तौळे2  टुट  जाण।।

1.  लोहे के कठोर करने की प्रक्रिया   2. जल्दी


-276-

दूजे   दी  रीसें1   कदी,  दिंदा  मत   तू  छाळ2

मुसीबत अपणी दा हल, तू अप्पु ही निकाळ।।

1. देखा-देखी  2.  छलांग

-277-

चोंह  दिनां   दी  चांदणी,  फिर  अंधेरी  रात।

जितणा की तू कातणा, भगत परगडें1 कात।।

1.  उजाले में

-278-

धियाड़ा1 बांका  सब  दा,  होंदा  नीं हर  रोज।

जो भर धियाडें शुभ हो, तू उसदी कर खोज।।

1.  दिन

-279-

अजकल हर जगह मिलदी, सस्ती भगत सलाह।

सुणदा  रैह  तू  सब  दी,  करदा  मन  दी  जाह।।

-280-

बीतियां   भुलां  तंइयें1 ,  भगता   मत   पछताह2

हुण किंहियां3 क्या करना, तिसदी जुगत4 लगाह।।

1.  के लिए  2.  पछताना  3.  कैसे   4. तरकीब


-281-

करोध करदा आदमी,  अप्पु1 करे नुकसान।

अपणे बक्खां2 फूकदा, हंडू3 लई4 उफाण।।

1.  खुद  2. किनारे 3. हांडी  4. लेकर

-282-

बरसाती नाळे-नदी,  करण  खूब  भन-तोड़1

जुआनी इस जीवन दा, किछ देहा2 ही मोड़।।

1.  तोड़ फोड़  2.  ऐसा

-283-

नराले1  सबदे  सुपनें,  हिम्मत ताक़त  प्यास।

हर माहणु अजब भगता, इत्थी दुस्से खास।।

1.  निराले

-284-

अध्धी दिंदे सारिया, भगता घूरण1 ढीठ।

खांदी वेला बैठ तू, फेरी2 अपणी पीठ।।

1.  घूरते हैं  2.  फेर कर

-285-

हर रोज़ होय नीं खरा, घरे च कड़:कड़ात1

नीं तां  होई  रैंहदा,  भगता  बड़ा  कपात2।।

1.  लड़ाई-झगड़ा   2.  कांड


-286-

न कोई नियम कायदे, न  तां  कोई  उसूल।

दूरा ते अम्ब1 लगदे, नेड़ें2 रुक्ख3  बबूल।।

1.  आम  2. नज़दीक से  3. पेड़

-287-

करदे रैहणा घर दी, झंब-झाड़1 धो-पोंछ2

अँगने-दुआरें बुरा,  लगदा भगता बोंछ3।।

1.  झाड़ना  2. धोना-पोंछना 3. घास/झाड़ी उगना

-288-

ईमाने  नें   सेहडी1 ,  दौलत  खूब  सुहाय।

नाहक़ कमाई भगता, मनुखां जो भरमाय।।

1.  अर्जित की

-289-

ज़र  जोरू  व  ज़मीन  दे,   झगड़े  बड़े  खराब।

खज्जल1 करदे माहणुआं, तमाम उम्र जनाब।।

1.  परेशान

-290-

नाम-धाम बदळी  करी,  बदलोंण  नि  इतिहास।

होर बदळना वश 'च नीं, नां 'च निकळे भड़ास।।



-291-

दरिया   किनारें  भगता,  जिन्हां  बणाये  घर।

बरखां च सताय उन जो, रुढी1 जाणे दा ड़र।।

1. बहने

-292-

जीणे   तांईं   जिंदगी,  जरूरी  होय  जोश।

सोगी1 सलामत रखणा, भगता पूरा होश।।

1.  साथ

-293-

जिन्नी   लगाई   डुबकी,  लंघेया  उस  पार।

नदी लुहाण1 निहाळदा, बैठी रिहा उआर2।।

1. उफान उतरना  2. इस पार

-294-

होई - बीती   गल्ल   दी,  कजो   करनी  खरोळ1

अज दी सुध लैणी भगत, पिछले छड्ड घचोळ2।।

1.  उखाड़  2.  झगड़े

-295-

पहलें सैहणा1 सिखणा, फिरी करना मखौल2

जो  सुणना  बुरा  लगदा, मत भगता तू बोल।।

1. सहना  2. मज़ाक 


-296-

पहलें   होंदा    था    बुरा,  भगत   लैणा1  धुआर2

मुश्किल अजकल इस बिणा3 , होय बड्डा वपार4।।

1.  लेना  2.  उधार  3. बिना  4. व्यापार

-297-

कोई बि कम्म करन जो,  करनी नि कदी देर।

नीं  तां   पोंदे   हंडणा1 , बड्डे  लम्मे2  फेर।।

1.  चलना  2.  लम्बे

-298-

सच्चा लग्गे जेहड़ा,  उसजो भगता पाळ।

झूठा  लग्गे  जेहड़ा, उसदी  कर तू टाळ।।

-299-

फरजां कनें हक़ भगता, जिंहियां सूरज-धुप्प।

दोयो  होणा  ज़रूरी,  नि तां निहारा1 घुप्प2।।

1.  अंधेरा  2.  घना

-300-

करना सैह हुण करना, कदी नि करनी टाळ1

जे कित्ता नि तां होणा, भगता फिरी मलाल।।

1.  टालना





-301-

नोंइयां नस्लां अजकल, भगता करण कमाल।

निक्के - याणे1 मारदे,  लम्मी तगड़ी2 छाळ3।।

1. छोटे बच्चे  2. मज़बूत  3. छलांग

-302-

ख़रीद-फ़रोख्त करदयां1 ,  कर पक्की पड़ताळ।

पछताणा  पोंदा  फिरी,  नेह् रें2  मारी  छाळ3।।

1.  करती बार  2.  अंधेरे में  3.  छलांग

-303-

कमाइयां नें अपणियां,  कर  भगता तू  नंद1

पता नीं दुयां काहलू2 , खिंज्जी3 लैणी पंद4।।

1. आनन्द  2.  कब  3. खींच  4. टाटG

-304-

जिंदगी  दे   झंझट   ते,  मुक्ति  दुआए  मौत।

दूंहीं1 दी नि है बणदी,  भगता कदी बणौत2।।

1.  दोनों  2. आपसी मेलजोल

-305-

अपणी-अपणी ढोलकी, अपणी-अपणी तान।

धुन  बणाई  नें  अपणी,   गा1 भगता तू गाण।।

1.  गाओ


-306-

गलाणा  सिद्धा1 सुथरा, पाणे  कजो2  पळेश3

गोळ-मोळ गल्ल भगता,  करदी बड़े कळेश।।

1.  सीधा  2.  क्यों  3.  घुमाव

-307-

चमकणे दिया चाहना1 ,  खोह्ण2 नि खुद दे रंग।

पैरां थल्लें3 नि खिसके, भगता कदी बि पंद4।।

1.  चाहत  2. खोयें   3. नीचे  4. टाट

-308-

इक  रोज़  जाणा  सबना,  होंदा  कजो  उदास।

खीरी1 पल तिकर भगता, रख जीणे दी आस।।

1.  आखिरी

-309-

रागें भुल्लियो रागण1 ,  गांदी जाळ-बताळ2

भटके जेहड़े हंडे3 ,  बिना  पुच्छ-पड़ताल4।।

1.  गीत गाने वाली  2. उलूल-जलूल  3. चले  4. पूछ-पड़ताल

-310-

भले – कित्तें1  नीं टुटदी,  भगत लचीली  डाल।

सफळ सैह जो समय नें, मिलाय अपणी ताल।।

1. आमतौर पर


-311-

बच्चेयां   फं:ग1  देई,  लै  करी  तू  जकीण2

तिन्हां जीणा दे फिरी,  भगता अपणा जीण।।

1.  पंख   2.  यकीन

-312-

नोंयीं पीढ़ी  दी  करा,  खूब  तुसां  परुआह1

खुद ते बांका2 बेहतर, भगत तिन्हां3 बणाह।।

1.  परवाह  2. सुंदर  3. उनको  4. बनाओ

-313-

खाणे ते कौड़ी1 दुआ2 ,  होंदे ठीक बमार3

डाढ़ी4 डांट-डपट करे,  भगता बड़े सुधार।।

1. कड़वी  2. दवा  3. बीमार  4.  सख्त

-314-

होणा है  हर  चीज दा,  भगता  इक  दिन  अंत।

तौळा1 कुसी दा मटड़ा2 , बस किछ टैम परंत3।।

1. जल्दी  2.  धीरे/देर से  3. बाद में

-315-

छैळ मुखड़े दी भगता,  होंदी अपणी शान।

होर बि बधाए उसजो,  मुखड़े दी मुस्कान।।


-316-

नज़र  जो  मिलाई   कनें,  भगता  बणदी  बात।

खडोह्1 आमणे-सामणे, खेल न कूह्कू-झात2।।

1.  खड़ा हो  2.  लुका-छिपी

-317-

शौकिनियां1 दा जाहलू2 , चढ़ी  जाए खुमार।

उमरा3 दी  तिस4 सामणे,  होए  भगता  हार।।

1.  शौक  2.  जब  3. आयु की  4.  उस

-318-

जिन्हां कितियां कोशिशां, बिरली होई हार।

बैठी  रै:  जो चुप करी,  सब रूढे1 मंझदार।।

1. बहे

-319-

जिन रुक्खां1 डुग्घी2 जडां, लमियां उमरां पाण।

तराहलेयां3  दा  भगत,  होआ4 पाय बछाण5।।

1. बृक्ष  2. गहरी 3. तराहले=उथले  4. हवा  5. बिस्तर, लेटा देना

-320-

हन जड़ हर मुसीबत दा, इन्सान दे वचार।

ये सुनक्खे1 माहणु जो,  दिंदे  करी  बमार।।

1.  हृष्ट-पुष्ट


-321-

होआं1 दा रुख मोड़ना, भगता मुसकल होय।

तिन्हां2  दे  हिसाब  कनें, पूणा लाणा पोय।।

1. हवाओं 2. उनके 3. आनाज से तिनके अलग करने की प्रक्रिया

-322-

चल्ले जो जग बदळणा, होए सब नाकाम।

जेहड़े खुद  गै  बदळी,  सैह  होए  महान।।

-323-

सोच बणाय माहणुआं,  तगड़ा1  या कमजोर।

सोच किंहियां2  सुधरगा,  कर भगता तू गौर।।

1. ताकतवर  2.  कैसे

-324-

चोंह  दिनां  दी  जिंदगी,  जी लै  अपणा जीण।

दुनिया इक प्याला भगत, पी लै अपणा पीण।।

-325-

मकसद होए सोहणा,  नीयत  सुथरी-साफ।

भगवान बि मेहर करी, भुल्लां करदे माफ।।


-326-

जीतणा मुसकल भगता,  हराणा होय सान¹।

हारे सज्जण जो मिले,  जितदेयां2  दा मान।।

1. आसान  2. जीतने वालों

-327-

हिरख1 कुसी दा नीं कदी,  करे कोई  बिगाड़।

हिरखियां2 दे चैन-सुखां, बस दिंदा ये साड3।।

1. ईर्ष्या  2. ईर्ष्यालु  3. जला/सडा

-328-

मतिहान1 जितणे करड़े2 , जिंदगिया विच पोण3

पास  होणे  पर  खुशियां, उतणी  ज्यादा  होण।।

1.  इम्तिहान  2.  कठिन  3. पड़ते

-329-

जिंदगिया विच जाहलू 1 , होणा लगे अराम2

ताहलू3  जीणा  भगता, लगणा  लगे  हराम।।

1.  जब  2.  आराम  3.  तब

-330-

कर्मा दिक्खी  मनुख  दी,  होंदी  सही  पछान1

दुनिया विच इक नाम दे,  भगत  मते2 इन्सान।।

1.  पहचान  2.  बहुत से


-331-

जितणी खुरकगे1  उतणी,  बधदी  जांदी  लुक्क2

जिंहियां3 कदी नि मिटदी, लाळचियां दी भुक्ख4।।

1.  खरोंचेंगे 2.  खारिश  3. जैसे  4.  भूख

-332-

बड़े  बुरे  होंदे  भगत,  ये  समै1 दे  चपेड़2

घणी गहरी चोट लगे, होय नीं रत्ति छेड़3।।

1. समय 2. थप्पड़  3. आवाज

-333-

भला नीं होए बणना,  अड़ेयो मुफ्तखोर।

होई  जांदे  बेहले1 , हत्थ  पैर कमजोर।।

1.  बेकार

-334-

संझा1  सोण2  ते2  पहलें,    बैठी   नें   कर  गौर।

कितणा कि छडेया3 करी3, कितणा  करना होर4।।

1.  शाम को  2. सोने से  3. कर छोड़ा  4.  और

-335-

दिक्ख बूटे बड़ोण1 ख़ुद, पोय नि कोई खिंज2

निभाइ अपणा फरज़ तू,  चांयें - चांयें सिंज3।।

1.  बड़े होना  2. खींच  3. सींच


-336-

किछ न किछ करदे रहणा, भगत खंगार-खं:ग1

हत्थ - पैर दमाक - दिलां2 ,  बेहलें2  लगे जंग।।

1. सावधान करने के लिए बनावटी खांसी    2. दिळ-दिमाग में   3. बेकार बैठे

-337-

इसा दुनिया च जेहड़े,  करदे  भगता शर्म।

सुणे सियाणे बोलदे, फुटण उन्ह दे कर्म।।

-338-

सभो साझे ढ़कोण¹ जो, पांदे अजकल खिंज।

अपणा पिंजण अप्पु ही, भगता हुण तू पिंज।।

1.  ओढ़ना

-339-

जाण सिधी पगडंडियां, सड़कें लम्मे फेर।

तौळा कर लै फैसला,  नीं तां होणी देर।।

-340-

जिंदगी राह  दौड़  दी,  मनुख  दौड़दा  जाय।

कोई निहाळे1 न  कुसी,  हार दा भै2 सताय।।

1.  इंतज़ार 2. भय


-341-

हर चीज़ा दा कुदरती,  इक तय कोटा होय।
मुक्की1 गिया तां भगता, कदी न पूरा पोय।।

1. खत्म, समाप्त

-342-

इक पल मुस्काई करी, बांका फ़ोटू आय।     
जिंद महेसा1 हसण ते,  हसीन होई जाय।।
1.  हमेशा

-343-

प्रभु प्यारेयां दे दिलें, पळदा  परोपकार। 

दुखियां तांईं दर्द नीं,  पूजा सब बेकार।।

-344-

जेहड़ा छोटा करदा,  बड्डा  करी  न  पाय।

चींटी कटे माहणुआं, माहणु कटी न पाय।।

-345-

जिस बली1 होय जेहड़ा, सैयो2 सैह बटाय3
इज्जतदार  दूजे  जो, इज्जत  ही  दरशाय।।
1.  के पास  2.  वही  3.  बांटे


-346-

सुआरथ    तांईं   अपणे,   नेडें   दिंदे    झोक1

मतलब निकळी जाय तां, हन पखलोंदे लोक।।

1.  झुकाव

-347-

नगद  पैसा सहेडया1 , गुआची2 बि  तां  जाय।

पर धन-दौलत इल्म दी, पक्का साथ निभाय।।

1.  अर्जित किया हुआ  2. खो जाए

-348-

बुरे कम्म करदे समें, लोक पिठ थपथपाण।

पर नतीजे दा करना,  खुद  पोए  भुगताण।।

-349-

कोई गल्ल बिण बजहें,  कुत्थी बि नीं होय।
पत्तर-डाळ नीं हिलदे, होआ1 जे नीं  छोय।।

1.  हवा

-350-

दूरा दियां सोहणियां, सुझदीं  चीजां छैळ।

बस नेड़ें जाई करी,  नज़रीं  ओंदा  मैल।।


351-

परदेसां   रही   माहणु,  घरे  तांईं  कमाय।

घरवाळी घरे च रही,  घरे जो घर बणाय।।

-352-

हर  कोई  होंदा  नि  खुस, कोसस  है  बेकार। 

जितणा कि होये ‘भगता’, बंडदा रैह् पियार।।

-353-

बंद मुठी तां बंद रैह्, हत्थ नि कदी मिलोय।

आपा  खोई  आदमी,  मान कमाया खोय।।

-354-

पक्का मिलेया  उसजो,  जिन्नी1 पाई  तोप2

जो बैठी दिखदा  रिहा, उद्दो3 मिल्ला कोप4।।

1. जिसने 2. खोज 3.  उसको  4. दुःख 

-355-

गळत गळत ही रैंहदा, चाहे मते कमाण1

सही सही ही रैंहदा, चाहे लोक  दबाण2।।

1. करें, कमाएं  2.  दबाएं


-356-

शांत माहणु  पछैणना1 , मुसकल  भगता  होय।

मनुखे दा रंग असली, करोध गास2 लिओय3।।

1.  पहचानना  2. ऊपर   3. ले आए

-357-

करोधें आई  माहणु,  जे पल  भर  चुप  रैह।

उमर भर दे झंझट ते, खाय नि कदी पलैह1।।

1.  मार

-358-

निशाणे अपणे-अपणे, अपणे ही हथियार।

सबनां दौड़ लगाइयो,  कुण  करे इंतज़ार।।

-359-

सुरग नरक ऐत्थी1 सभो2 ,जिंद बड़ी अणमोल।

सिद्धा3 सादा जीण जी,  जीभा4 मिश्री घोल।।

1.  इधर  2. सभी  3. सीधा  4. जीभ में

-360-

भगता   होंदा  नीं   भला,  बेहद  कोई  भोग।

खाई1 चीज जरायती2 ,बिगड़े तन मन तोल।।

1.  खा कर   2.  केमीकल युक्त


-361-

बूटे  जो  मिट्टी  कनें,  पाणी  हौआ1  खाद।

बात, वक़्त, प्रीत करदे, रिस्ते जो आवाद।।

1. हवा

-362-

सोची-समझी बोलणा, फिसले न ये ज़ुबान।

तोप ते ज्यादा करदी,  भगता  ये नुकसान।।

-363-

नां1 बदळना नि है भला, गुआचे2 इक पछाण।

नोएं - पुराणे 'च  चले,  पीढ़ी  भर घमसाण3।।

1. नाम  2. गुम हो जाए  3.   द्वंद

-364-

जुआड़ी दित्तीं फसलां,  फळ  बूटे  बरबाद।

सैळां1 टारी2 झाकदे, बांदर घुमण अज़ाद3।।

1.  स्लेट  2. छितरा कर  3.  आज़ाद

-365-

हत्थे  च  रासन  कारड़,  डिपुये  वक्खी  दौड़।

कम-कार कुछ नीं भगता, हुण बणे सब गपोड़।।


-366-

बाहरा  ते  बड़े  भले,  अंदर ते किछ होर।

चेहरे ते पछैण नीं, कुण शरीफ कुण चोर।।

-367-

इक  पासे  ते  बढ़त  है,  तां  दूजे   ते  घाट।

ये  पक्का  दस्तूर है, विरली  इसदी  काट।।

-368-

तलाश रोजी-रिज़्क1 दी, लई गई परदेश।

सुपनेयां ओंदा  रिहा, रातीं अपणा देश।।

1.  रोज़गार

-369-

लोकां दी होई गई, मद्धम अजकल याद।

पुराणे  लहचे1  भुलदे, नोंएं  होंणे  बाद।।

1.  शोर-शराबा / कांड

-370-

उडांदे हन सब भगता,  अप्पु अपणी पतंग।

कुसी दी छैळ रंगली,  कुसी निपट बदरंग।।


-371-

छुंडियां-छुंडियां1 बटे, रिहा  नि  रती  थपाक2

नाळसियां3 दूजे दियां, करदे कम्म नि खाक।।

1.  छोटे-छोटे समूह  2. एकता  3.  अपमानजनक बातें 

-372-

भगत माहणु  बहरुपिए,  अज किछ तां कल होर।

पछैण अपणी खुद बणा:, बण नि कुसी दा ढोर1।।

1.  छाया/साया

-373-

कमाय-पाय  दे  सब  जण,  होंदे  पहरेदार।

बदळोंदा जाय पहरा, चलदा  रैह्  संसार।।

-374-

कन्न सुणन हाखीं दिखण, जीभ सुआद लगाय।

हर कोई  करम  करदा, अपणा  धरम  निभाय।।

-375-

बड़ा सहारा जीण दा, होंदी  ये उम्मीद।

है बड़ी जादूगरनी,  इसदे  लोक मुरीद।।


-376-

चतरे  होय  लोक  घणे,  हद ते  बधदे जाण।

बन्ने1-चन्ने2 दी भगत,  रखणी खरी पछाण।।

1.  हद के निशान 2. घर की चौड़ाई वाली हद

-377-

डुग्घे1 असर हन करदे, शब्द होण् या सुआद।

जीभ  कुसी जो तारदी2 , कुसी  करे बरबाद।।

1. गहरा  2.  उद्धार करती 

-378-

हर  तरफ माहणु  सुझदे1 , छोटे कोय  महान।

सब किछ मिलदा मता2 , घट मिलदे इन्सान।।

1. दिखते  2. बहुत 

379-

बईमानियां  करण जो, थे तां मते तियार।

दा1 नि लग्गा तां भगता,  रैहे  इमानदार।।

1. मौका

-380-

आई खड़ोय साह्मणे, इक दिन छुप्या पाप।

गुनहगारां  जो  भगता, रैह्  होई  नें  ताप।।


-381-

हर  कोई  इत्थु1 समझे, अप्पू 2 जो ही खास।

तू बि तां घट3 नीं भगता, होंदा कजो उदास।।

1.  इधर  2.  खुद  3.  कम 

-382-

कुसी मरने परंत1 हन,  खूब दखांदे2 शोक।

जींदेयां हाल पुछणा, घट3 ही जांदे लोक।।

1.  उपरांत  2. दिखाते  3. कम

-383-

जींदयां  दीं  बेक़दरां, मरयां  दा  सत्कार।

नकळी ब्योहार भगता, बणावटी संसार।।

-384-

माहणु  जांदे  गुज्ज़री, करनियाँ रही जाण।

कर्म ही घड़दे भगता, खरी-खोटी पछाण।।

-385-

बड़ेयां  माहणुआं  दे,   बड्डे - बड्डे  गाण।

तू  सुणदा  रैह  भगता, तेरा निक्का1 हाण2।।

1.  छोटा  2. कद


-386-

सिन्ना1-सुक्का2 कच्चरा,  सैले3 - नीले  डोल4

तौळे5 ही कबाड़ बणे,  बिकदे हुण बिण मोल।।

1. गीला 2. सूखा  3. हरे  4. ड्रम  5. जल्दी

-387-

सबना तांईं बाट1 इक,  इक तकड़ी इक तोल।

उस अग्गें  बरोबर सब,  सबना दा इक मोल।।

1.  चीजें तोलने के काम आने वाला लोहे/पत्थर का टुकड़ा

-388-

भुख-नंग गरीबी कुथी1 , कुथी धन बेशुमार।

मालक जाणी - जाण2 तू, लीला अपरंपार।।

1. कहीं  2. सर्वज्ञ 

-389-

कमजोरियां ते अपणी,  कोई  नीं अणजान।

जाणी  नें मचळे1 बणन,  भगता ये इन्सान।।

1. अनजान

-390-

सभना1 दा सबो-किछ2 दा, इक तय कोटा होय।

जे   लंघेया3  तां   फिरी,  भगता   टोटा4  पोय।।

1.  सभी  2. सभी कुछ  3. लांघ दिया  4. कमी


-391-

इत्थु बोहते दोगले,  सिद्धडां1  दी  तरोट2

कुसने3 भोळया भगता,  तेरी बणे वनोट4।।

1.  सीधे लोगों  2. कमी  3. किसके साथ  4. सामंजस्य

-392-

पार न कोय किस्मत दा,  डुग्घे1 इसदे फेर।

मीदां2 जो जगाय कदी,  कदी करी दे ढेर।।

1.  गहरे  2. उम्मीदों

-393-

होरना  पछांह1 चलदा,  भुलदा  अपणी  राह।

जाहलू 2 ठोकर लगदी, सुकदा3 तिसदा4 साह।।

1. पीछे  2. जब  3.  सूखता  4. उसका

-394-

जिन्नी  राहां  तोपियां1 ,तिसदी2 रही पछाण।

बणियां वत्तां हंडदा3 , भगत रिहा अणजाण।।

1.  तोपणा-ढूंढ़ना  2. उसकी  3. चलता

-395-

जतन करी जदी भगता, बणी घरें नि बणोट1

चेलें   झुलाए  मुट्ठे2 ,  खूब  निकाळे   खोट।।

1. मेलजोल    2. मोर पंखों का बना चंवर


-396-

दूजे  दियां नाळसियां1 ,  करदे  फिरदे   गाण।

भगत समझ तिन्हां दियां, नीतां कोई काण2।।

1.  बुराईयां  2. टेढ़ापन 

-397-

हर जीवे दा जिस्म है, नराली1 इक मशीन।

कुदरत कारीगर बड़ी, इसदे कम्म महीन2।।

1.  अनोखी  2.  सूक्ष्म, जटिल

-398-

दाळ  घरे  दी  कुक्कड़ी,   बाहरा   दी   कबाब।

सहज मिले दी कदर नीं, दुनिया अजब जनाब।।

-399-

हाल जिन्ह  दे  मंदडे,  सैह  बि पुच्छण  हाल।

कितणा भला है भगता,  ये जग खूब कमाल।।

-400-

जाणा सारेयां  इक दिन,  आम होण या खास।

मनुख फिरी  भी पाळदे, अमर होण दी आस।।





-401-

धौळे  होए  जाहलू,  कौड़ियां1 उपर बाल़़।

उस पर चेहरें झुरियां, करीता2  बुरा हाल।।

1. कनपटियां  2.  कर दिया

-402-

पतझड़े रुक्खां1  भगता,  पई  जाय  पंगूर2

ज़ख्मा जो कदी न कदी, आई रैह् अंगूर3।।

1.  पेड़ों  2.  अंकुर  3. घाव का सूखना

-403-

चुक्की नें इक जगह ते, दूइया1  लगे ढेर।

दस्सा किंहियां मुकणा, ये कूड़े दा फेर।।

1.  दूसरी में

-404-

सब दे मतिहान1 बखरे, बख पर्चे बख खेल।

इक दुये दी नकल करी,  माहणु  होंदे फेल।।

1. इम्तिहान

-405-

गल्ल-बात बरताव ही, असली रंग दखाय।

माहणुयें  दा रूप तां,  वक़्त बदळदा जाय।।


-406-

वक़्त इक उफणदी नदी, है बगदी चुपचाप।

चोंह  पासें ये  भगता, जाए  छड़दी  छाप।।

-407-

जो बिक़दा सैह टिकदा, अटल सिद्ध ये जोग1

नज़र  नीं  ओए  जेहड़ा,  तौळ2 भुलदे  लोग।।

1.  योग  2.  जल्दी

-408-

दुद्ध धुळेया कोय नीं,  दलां  दी इक तसीर।

मौका मिलेया जिसजो, बैठा बणी अमीर।।

-409-

होंदा अम्मा जांदिया, छिन-भिन सब घरबार।

जाहलू    बापू   गुज़रे,   बिखरे   ये   संसार।।

-410-

बणादे  समझदार  हन, मनुखां  जो  हालात।

उमरा दी इस च भगता, खास नि कोई बात।।


-411-

जिन्हां दी चली भगता, सैह चलांदे रैह।

देश-धन लुटेया कनें,  मौज उडांदे रैह।।

-412-

भगत गल्लां गलाणियां, बड्डियां हन असान1

ग्लाये2  जो  दस्से3  करी,  माहणु  सैह  महान।।

1. आसान  2. बोले हुए  3. दिखाए

 -413-

 चमकाय कोई कितणा, मुखड़ा नि झूठ ग्लाय।

मेकअप चढ़ाई मनुख,  मन  अपणा  भरमाय।।

-414-

बड़ी हैसियत दा सदा, होंदा ही है गान।

चाहीदा पर दिल बड़ा, देणे तांईं  दान।।

-415-

अपणेयां दा साथ तां, सबना जो ही भाय।

धोखा  दिंदे  जेहडे,  नि  होंदे  हन पराय।।


-416-

लिक्खेया  तक़दीर  दा,  बदळेया   नीं  जाय।

माहणु करी मेहनता, तक़दीर मुड़1 लिखाय।।

1. फिर से

-417-

पैर   पहारी1  बैठया,   दिखाबा  बणी  रोग।

चश्मा बदळी दिक्खया, पणछोंदे2 नीं लोग।।

1. पसार कर 2. पहचाने जाते

-418-

वक़्ते  दी  चाल भगता,   होंदी  बड़ी  अजीब।

कुत्थी1 कटेयां नि कटे, कुसी2 होय न नसीब।।

1. कहीं  2. किसी को

-419-

गरीब  सग्गे1 मिळण तां, लोक चुरांदे हाख।

अमीरां कन्नें2 कढ़दे3 , दूर - दूर  दे साख4।।

1. सगे  2.  के साथ  3. निकालते  4.  रिश्ते

-420-

इतणा कौड़ा नि बणना,  मुंह नि लोक लगाण।

इतणा मिट्ठा नि बणना, साबुत1 निगळी जाण।।

1. पूरा का पूरा


-421-

आईना होंदे करम,  दसण मनुख दा ढोर1

तेरे  करम  तेरे  वश, कर लै भगता  गौर।।

1. छाया

-422-

रोसे1- लाह्मे2   छड्डणे,  करी  चलणा  पियार।

भगता  अणमुल  जिंदगी, मिलणी नीं हर बार।।

1. नाराजगियाँ 2. शिकायतें

-423-

सब्र करने दी समरथ1 , होय बड़ी अणमोल।

बाकी गुणा दा  इसते, घट2  ही  होए  तोल।।

1.  समर्थ  2. कम 

-424-

सान1  बनाणी  जिंदगी,  तां  अजमाई2  दिक्ख3

दिल दियां गल्लां सुणना, कनें सुनाणा सिक्ख4।।

1. आसान 2. आजमा के  3. देख  4. सीख

-425-

तू समें दी हर घड़िया, भली भांतें गुज़ार।

बीतेया  बेला भगत,  ओंदा नीं दो बार।।


-426-

जिंदगिया कनें जितणे, शिकवे कनें सुआल।

होण  माहणु  दे  उतणे,  भगता  मंदे  हाल।।

-427-

ज़रूरी जे ज़रूरतां,  पूरा करना सान1

लाळचियां दे रैंहदे, अधूरे ही रमान2।।

1. आसान 2. अरमान

-428-

बाहरा  ते  बणी-ठणी,  लोकी लगदे  छैल।

भगुआन जाणे कितणा, कुसदे अंदर मैल।।

-429-

उच्चे  लगाणे  कितणे,  भगता  अजकल  बाड़।

कोई किच्छ बि लै करी, नि रुकदी हुण जुआड़।।

-430-

कुसी  दे  नसीव  गद्दे,   कुत्थी टाट बछाण1

सब्बो किस्मत-कर्म दे, होंदे भगत कमाण2।।

1. बिस्तर  2.  कमाई


-431-

दुद्ध  जो  बणादे दहीं,  लाई  करी जमैण1

जाहलू दोयो मिलदे, बख नीं रैह पछैण2।।

1. जामन  2. पहचान

-432-

जदिया1 ते लगा डिपुयें, मिलणा सस्ता नाज2

खेती-बाड़ी  करन दा,  घटदा गिया रुआज3।।

1.  जब  2. अनाज  3.  रिवाज 

-433-

चंगी - भली  खबरां   दा,   होंदा  सत्यानाश।

सोशल मीडिया दा नीं, रत्ति रिहा विसुआस।।

-434-

इस तरफ कदी उस तरफ, दिंदे भगता झोक1

हवा दिक्खी नें पूणा2 , दिक्ख  लगांदे लोक।।

1. झुकाव  2.  हवा से दाने और भूसा अलग करने की प्रक्रिया

-435-

कदी जंग्घा पीड़ दसण,  कदी वांहीं च पीड़।

पर भत्ता1  दे थालुये2 , भगता देह्ण3  धरीड़4।।

1.  चावल  2.  थाली  3.  दें  4. खींच


-436-

बाहर जो ओय इक दिन, ढक्या-छुप्या1 पाप।

पापियां पोय झेळणा,  भगता तिसदा2 ताप।।

1.  ढका-छुपा  2.  उसका

-437-

प्यार च होर बस किछ नीं, अपणेपण दा वास।

नफरत  च   होये   भगता,  नापसंदगी  खास।।

-438-

पहलें तां  होंदा  रिहा,  मेले विच ही मेल।

हुण इंटरनेट ज़िरिये, खब्बे1 हथ दा खेल।।

1.  बांयें

-439-

कल किंहियां1 कटोंहगा2 , हर  कोई अणजान।

जिसजो3  है इल्म इसदा,  सैह होय भगुआन4।।

1. कैसे 2. कटेगा  3. जिसको  4.  भगवान

-440-

सुणनें  जो   छैळ1  लगदे,  दूरें  बजदे  ढोल।

नेडे2 ते पता चलदा, लय ताल दा घचोल3।।

1. सुंदर  2. नज़दीक  3. मिलावट


-441-

मोह माया मेला जग, चलदा  रै: दिन रात।

खरीदे बेचे माणस, जितणी की  औकात।।

-442-

जाहलू1 पोए  विपता2 , लोक  इक-मुट्ठ  होण।

भुलाई भेद-भाअ3 जो,  कन्नें4 भगत खड़ोण।।

1.  जब 2. विपदा  3. भेद-भाव  4. साथ-साथ

-443-

पाणे  तंइयें1  इस जो, इक  उमर लगी जाय।

तेरे देसे च भगता,  मिलदा मुसकल न्याय।।

1. के लिए


-444-

जिन्हां कोई कम्म1 नीं, न होय कोई कार2

तौळे3  ही  सैह भगता, होई जाण बमार4।।

1. काम  2. रोज़गार  3. जल्दी  4. बीमार

-445-

किस्मता नें ही मिलदा, भलामाणस पड़ेस।

नीं तां पोंदा  झेळणा, रोज  नोंआं कळेश।।

-446-

कामयाबी है भगता, जिंहियां1 इक भयाग2। 

उसजो मिलदी जेहड़ा3 , जल्दी जाए जाग।।

1.  जैसे  2.  सबेर  3.  जो

-447-

ठेले    वाळयां    कन्ने,   बहसां    करदे   भाव।

मॉलां1 विच बिण बोळयां, लगाण बटुयें2 ताव।।

1. मॉल  2. बटुआ

-448-

जिन्हां नि लगाए कदी, अपणे खेतां  बाड़।

तिन्हा दी होंदी रही, भगता सदा जुआड़1।।

1. उजाड़

-449-

कोई मेहनत करदा, अपणी जिंद सजाय।

कोई भागां झूरदा, अपणी जिंद गुआय।।

-450-

सही गलत दी जाहलू 1, मुसकल होय पछाण।

जिसजो  सब  सही  मनदे, उसजो ही तू मान।।

1.  जब


-451-

नच्ची - कुद्दी1  जेहड़ा,  अजकल तोड़े तान।

सैहो2 इसा दुनिया विच, भगता है परधान3।।

1.  नाच-कूद कर  2. वही  3.  बड़ा/प्रधान

-452-

गुरू बिण कदी नि मिलदा, कुसियो कोई ज्ञान।

एकलव्यें  मूर्त  घड़ी,   द्रोण  लिया  था मान।।

-453-

हौछे1 जो गोछा2 मिला, सैह् दखाय3 कि लगाय।

खड्ड  तरहाली4  बगदी,  गड़त्त5 मता6 मचाय।।

1. औछा 2. अंगोछा 3. दिखाय 4. उथली  5. शोर  6. बहुत

-454-

प्यूळे1  पत्तर क्या पता, काहलू2 झड़ी  जाण।

हरेक संझ-भियाग3  दा,  भगता शुक्र मनाण।।

1.  पीले  2.  कब  3. शाम-सुबह

-455-

हर मौका हर बारिया,  औंदा नीं दो बार।

इंहियां1  ही है चलदा, भगता ये संसार।।

1.  ऐसे 


-456-

बीड1-बन्ने2 गै बिगड़ी, खिल्ले3 सुझदे खेत।

अन्न  पुगांदे4  टब्बरां 5 , थे  ये   मिट्टी  रेत।।

1. मेंड  2. हद के निशान 3. उजाड़ 4. उपलब्ध करते 5. परिवारों को

-457-

माणदारां1 जो मुसकल, होया करना काम।

ब‌‍इमान2 मारण तिन्हां, गोळियां सरेआम।।

1.  ईमानदारों  2.  बेईमान

-458-

टोंडयां  दे   टोंडपणे, ओंदे  नि  कदी  बाज।

बेशरमां जो क्या पता, शर्म होय क्या लाज।।

-459-

करतूत   करम - करनियां, हासे  कोई  रोय।

अपना बोझा अप्पु ही, माहणु भगता ढोय।।

-460-

लोकराज  कुंभ  जमदा, वरहे1पंज2 परंत3

दान देइ वोट अपणा, जुम्हीं4  मारण संत।।

1. वर्ष  2. पांच  3. उपरांत  4.  डुबकी


-461-

खून–खराबा लुट मची, लुकदी फिरदी ळाज।    

लोक राज  नां  दा  भगत,  सारें  जंगल राज।।

-462-

नुमांईंदे   पब्लिक   दे,  नोंयें - नोंयें  कांड़।     

खुंड-जोड़े तोड़ी करी, फिरदे भगता सांड़।।

-463-

ज़ात धरम  दा  नां लई,  नेता  पांदे  फूट।

सुपने दस्सी सोहणे, करण वोट दी लूट।।

-464-

दणदणाइ1 हुण दौड़दी,  भीड़  होई  दबंग।

तू  बैठी दिक्ख भगता, लोक राज दे रंग।।

1.  दनदनाती

-465-

पैसा  बिण  मेहणत दा, कदी भला नीं  होय।

राजनीत सुआरथ दी, बसदा मुलख डुबोय।।


-466-

गणादे  सैह  सामणे, जात  धरम  दे खोट।

बैठी परोखा1 गिणदे, कुसदे कितणे वोट।।

1. पीठ पीछे से

-467-

चुनाबी  टैमें  करदे, नेते  कदी  नि  नांह1

जे जित्ती गै तां फिरी, तू कुत्थु मैं कुतांह2।।

1.  इन्कार  2. कहां

-468-

हेर - फेर  चोरी  करी,  दौलत  खूब  जुटाय।

पढलिखेयां ते अधपढ़, फिर चाकरी कराय।।

-469-

चुनावां  ओंदयां  चढ़े,  नेतेयां  जो जोश।

वायदे बिचारां सुणी, जनता खोए होश।।

-470-

कर्ज़ अमीर गरीब दे, होणा  लग्गे  माफ।

जनता दा धन इंहियां, नेता करदे साफ।।


-471-

नोखा1  इस   देशें   बड़ा,  बणेया  लोकराज।

सब्बो सोचण किंहियां, भगता मिल्ले ताज।।

1. अनोखा

-472-

राजनीत होर किछ नीं,  है ये इक व्यापार।

नियम कनून उसूल नीं, बस है कारोबार।।

-473-

मुफ्त  बटोए   देश-धन,   सौगातां  दा  दौर।

आदतां बिगड़ी गइयां, लोक बणे कमचोर।।

-474-

मुद्दे  हुण  चुनावां  दे,  बणी  गै  धरम-जात।

भगत भीड़ देणा लगी, लोकराज जो मात।।

-475-

पहलें  मने  ते  अपणे, निकाळ  सारे खोट।

पाणा निकळेयां फिरी, भाऊ अपणा वोट।।


-476-

चुनावां  टैमें  रखदे,  ज़रा नीं अप्पु  होश।

चुण्यो नेत्यां जो फिरी,  देणा लगदे दोष।।

-477-

लुभाणे   तांईं     जनता,  जेहड़ा    होय    तेज।

भगता उसजो ही मिलण, अजकल कुर्सी मेज।।

-478-

लोकराज राजनीति च, जो बि करदा घमंड।

चुनावी   टैमें   जनता,  तिद्दो1  दिंदी  दण्ड।।

1. उसको

-479-

इसदे काहली1 उसदे,  सिरे च  सजदा ताज।

इस जो गलांदे भगता, लोकां दा हुण राज।।

1.  कभी

-480-

राजनीति ते नि बधिया, है  कोई रुजगार1

ठाठ होण चोखे कनें2, पेंशन  है  दमदार।।

1.  रोज़गार  2.  और


-481-

लैक्शन1 नतीजे करदे, नोखे2 उल्लट-फेर।

कई  मीदां3  जागदियां, कई  होंदियां ढेर।।

1.  चुनाव  2.  अनोखे  3. उम्मीदें

-482-

लोकराजे विच भगता, होंदा खूब बपार।

नेते  जनता  दे  चुणे, बिकदे भरे बजार।।

-483-

चुनाओ प्रचार इक है, चतुर-चलाक उपाय।

जेहड़ा  भले - माणसां, खूब करी भरमाय।।

-484-

देशे विच ‘गण’ ते ‘तन्त्र’, अजहें भगता दूर।

लोकां  जेह्ड़े  थे  चुणे,  राज  दे  नशें  चूर।।

-485-

पंज वरिह्यां1 च मिलणा, होय इक अद्ध रोज़।

फिर कुत्थु  गंगू  तेली,  कुतांह2 राजा  भोज।।

1.  वर्षों में   2.  कहाँ


-486-

जनता  दे  हर  दर्द - दुख,  जे   होई   गै  दूर।

कुस होणा कुसी पिच्छें,  चलणे जो मजबूर।।

-487-

गलत राजनीत दा फळ,  था मसला कश्मीर।

हल बणेया  है  जिसदा, भगता  टेढ़ी  खीर।।

-488-

अनिह्यें1   राजनीतियें,  कित्ते   माड़े   हाल।

होय कश्मीर तंइयें, भस्म अणगिणत लाल।।

1.  अंधी

-489-

राजनीति रोज रचदी1 ,नोंयें-नोंयें  खेल।

नेता मारदे मौजां, जनता दा होय् तेल।।

1.  रचाती

-490-

राजनीत   दी  पोथिया1 , लिखेयो  नीं  उसूल।

इक-इक करी नें हिलदी, लोकराज दी चूळ2।।

1.  किताब में   2.    कील


-491-

जनता दा मतिहान1  इक,  होंदे  भगत चुनाव।

पार पाया तां बधिया2 , नीं3 तां4 हाल खराब।।

1.  इम्तिहान  2.  अच्छा  3. नहीं  4. तो

-492-

चुनावां दा वक़्त भगत, होय बड़ा बलवान।

नेतेयां  जो  ये  करे,  रज्जी1  नें2  परसान3।।

1.  जी भर  2. के   3. परेशान

-493-

वोट दिंदिया  बारिया, करना सोच  बचार।

गलत फैसले दी भगत, झेलणा पोय मार।।

-494-

वोटां   लैणे   तंइयें1 ,  बोलदे  बड़ा  छैळ2

बरती3 नें पता लगदा,  अंदर कितणा मैळ।।

1.  के लिए   2.  अच्छा  3. व्यवहार करके

-495-

असां दा लोकराज  है,   भगता  बड़ा  कमाल।

प्रधानमंत्रियो1 कढदी2 , जनता खुल्ली गाळ3।।

1.  प्रधानमंत्री को  2. निकाले  3. गाली


-496-

राजनीत दी घोड़िया, जो बि होया सुआर1

गद्दी पाण - बचाण जो, करे भाव  तकरार।।

1.  सवार

-497-

चपड़ासी तां  चाहिदा, दस्स  जमातां  पार।

पर मंत्री जांदे बणी, अनपढ़ निपट गुआर।।

-498-

काबलियत नीं, जाति जो, दिंदे भगता वोट।

ये इस लोकराजे दा, सब ते  बड्डा  खोट।।

-499-

राजनीति होर किछ  नीं,  है बस इक रुज़गार1

लोक सिओआ2 बहानें, करदे लोक  वपार3।।

1.  रोज़गार  2.  सेवा  3.  व्यापार

-500-

चुनाव  दे  मुद्दे  बणे,  हुण1  धर्म  कनें  जात।

होरना दी तां घट2 ही, होंदी अजकल बात।।

1.  अब   2.  कम


-501-

न  कोई    विचार - मत  है,   न   हन  कोई  उसूल।

जिसते टिकट मिले खरा,   होर सब किछ फिजूल।।

-502-

चुनाओ1  जितण  तंइयें2 , करदे  सब तक़रार।

लोकराज विच ‘लोक’ दी, होंदी भगता हार।।

1.  चुनाव 2.  के लिए

-503-

सब गलाण,मैं बि मनदा, लोक हन समझदार।

चुनावां च  खांदे  कजो,  मार  सैह  हर  बार।।

-504-

चुनावी परलोभण1 दी,  होण  लगी  भरमार।

मिलणा सब बैठी करी, कम्म न कोई कार।।

1. प्रलोभन

-505-

चुनावां  टैमे  करदे,  अजकल उसजो याद।

गऊ जो नि पुछदा फिरी,  कोई उसते बाद।।


-506-

नेते  जनता  जो  मनण, अपणी  इक  जागीर।

जनता जागी जाय तां,  खुद लिक्खे तकदीर।।

-507-

नेता   पलड़े   बदळदे,   भगता   बारम्बार।

जनता कैंह नीं बदले,  अपणे कदी बिचार।।

-508-

नाच   नचाये   बौहते,  जळी  जाय  ये  वोट।

अप्पु1 छड्डी2 नें सबदे, सुझदे3 भगता खोट।।

1.  स्वयं, खुद  2.  छोड़ कर  3.  दिखते

-509-

नेता वख-वखे1 दल  दे,  मिली मारदे गप्प।

तिन्ह2 दे चेले करदे, झगड़े‌  कनें  झड्डप।।

1.  अलग-अलग  2.  उन

-510-

है लोकां दिया समझां, ज़रूर  कोई  खोट।

पछतांदे हर  बारिया1 , पाई अपणा वोट।।

1.  बार


-511-

गबनां-घोटाळयां दी,  धरती  बणया  देस।

नेता बणे जिन्हां पर, कई कचहरी केस।।

-512-

पलें - पलें1  बहरूपिए, भगत   बदळदे   रंग।

सुआर्थ सधेरण अपणे, भहाना2 लोक मंग3।।
1.  पल-पल   2.  बहाना   3.  मांग

-513-

स्टेजां ‘च  खडोई कनें,  गालीं देण गुआर।

किंहियां होंणा भगता, इस देश दा सुधार।।

-514-

कोई नीं दु:धें-धुळया, कोई नीं  बिण खोट।

जो सबना ते घट बुरा,  पाणा उसजो वोट।।

-515-

जेहड़े   वोटर   भगता, ‘नोटा’  बटण   दबाण।

पंज साल वाद मि:लया, मौका व्यर्थ गुआण।।


-516-

बड्डे  लोकां  जो  कदी,  जे  होई जा जेल।

अंदर बही¹ बाहरले², खुल्ले खेलण खेल।।

1.  बैठ कर  2. बाहर के

-517-

सब दी अहमियत अपणी, अपणे अपणे ठाठ।

सज्जण  बंडदे  खुशियां,  बुरे  सिखांदे  पाठ।।

-518-

बूटे  जो   मिट्टी  कनें, पाणी   हौआ1 खाद।

बात, वक़्त, प्रीत, करदे; रिस्तेयां आवाद।।

1.  हवा


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